Saturday, February 23, 2019

Pulwama Terror Attack - Zimmedaar Kaun?

Pulwama Terror Attack - Zimmedaar Kaun?

A write up on our Martyr who gave their lives in Pulwama Terror Attack

Pulwama, 14th February, Terror Attack


The whole nation is unhappy over the Pulwama attack on February 14. The attack on our soldiers has jumbled the people of the whole country. In such a condition, all the people of the country should work with their discretion, and maintain cordiality, love, and brotherhood among themselves.

It is justified to be unhappy with this tragic terrorist attack. It is also appropriate to show resentment on the cruel assassination of our soldiers, but it is wrong to celebrate it like a national event. At the time of the rally on the streets, during the candle march on India Gate, many people are taking selfies. Taking Group photos with friends, colleagues and family members. This time is not to celebrate. This is the time to express your grief, express your anger.

Now if we talk of social media, on which people are showing their support, their anger, their grief, but are also trapped in the mutual debate. Saying each other bad words. Others are being seditious and proving themselves patriotic. You do not become a patriot just by putting a black DP or a tricolor on WhatsApp and Facebook. If you are a true patriot, then, in any case, you will not lose your discretion and will encourage others to do this. This will keep the atmosphere in the country peaceful and cordial. Patriotism does not mean that you should stand on the border and fight with the enemies; our soldiers are doing that very well. If patriotism is to be proven, then we can look after each other, by helping and supporting each other. Provide proof of being a sensible citizen not trapped in unnecessary debates. We can prove our patriotism by not damaging the resources of our own country, roads, transport resources, markets, houses, shops, and all these things.

We can see people are protesting every here and there. Slamming Pakistan Murdabad. Anger is justified. But what is the use of slamming Pakistan Murdabad in our own streets?  If we have to show resentment then we should show resentment in front of our leaders' house. We should protest in front of their house and ask them that now the water has gone above the head. Now there is a need to do something, the brick needs to be answered by stone. Pakistan needs to be told if we can welcome your artist, music, sportsmen, your food and drink, then we can also punish you by pulling out of your pits on this lowly act, and if our leaders can not do this, then empty the chair right now and give it to someone who can teach Pakistan a lesson.

I just want to say this at the end

Shor macha hai shor,
Yeh dekho satta ke galiyaaron mein,
Kaun hai apana kaun paraaya,
Veeron ke hatyaaron mein.
Prem divas ki bhari dupahari,
Aag ka gola bhadka tha,
Chand shaheed huye the lekin,
Saara desh he1 tadapa tha.
Baandh kafan maathe par apne,
Jo the hamaare paharedaar mein,
Kaun hai apana kaun paraaya,
Veeron ke hatyaaron mein.

Sheikh Mustak 'Sahib'

Youtube Movie Link


Friday, February 22, 2019

पुलवामा टेरर अटैक - ज़िम्मेदार कौन?

पुलवामा टेरर अटैक - ज़िम्मेदार कौन?

पुलवामा टेरर अटैक में मारे गए शहीदों के नाम एक लेख


Pulwama, 14th february, Terror attack

14 फरवरी को हुए पुलवामा अटैक पर पूरा देश दुखी है| हमारे जवानों पर हुए हमले ने पूरे देश के लोगों को झकझोड़ कर रख दिया है| ऐसी हालत में देश के सभी लोग आपस में विवेक से काम लें, और आपस में सौहार्द, प्रेम और भाईचारा बनाएं रखें|

इस दुखदायी आतंकी हमले से दुखी होना जायज़ है| हमारे सैनिकों की निर्मम हत्या पर आक्रोश दिखाना भी जायज़ है, लेकिन इसे एक नेशनल इवेंट की तरह सेलिब्रेट करना ग़लत है| गलियों में मोर्चे के समय, इंडिया गेट पर कैंडल मार्च के समय, कई लोग सेल्फी ले रहे हैं| अपने दोस्तों, साथियों, परिवारजनों के साथ ग्रुप फोटो खींच रहे हैं| यह वक़्त सेलिब्रेट करने का नहीं है, अपना दुःख, अपना गुस्सा ज़ाहिर करने का है|

अब बात करते हैं सोशल मीडिया की, जिस पर लोग अपना समर्थन, अपना गुस्सा, अपना दुःख तो दिखा ही रहे हैं लेकिन साथ ही साथ आपसी बहस में भी फँस रहे हैं| एक दूसरे को अच्छा बुरा कह रहे हैं| दूसरे को देशद्रोही और ख़ुद को देशप्रेमी साबित करने में लगे हुये हैं| सिर्फ व्हाट्सऐप और फेसबुक पर काली डीपी या तिरंगा लगा लेने से आप देशभक्त नहीं बन जाते| अगर आप सच्चे देशभक्त हैं तो किसी भी हाल में अपना विवेक नहीं खोएंगे और बाकी लोगो को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे| इससे देश में माहौल शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण बना रहेगा| देशभक्ति का मतलब यह नहीं कि आप सरहद पर जाकर खड़े हो जाएं और दुश्मन से लोहा लें, वो हमारे सैनिक बहुत अच्छे से कर रहे हैं| अगर देशभक्ति दिखानी ही है तो हम अपने आस-पास एक-दूसरे का ध्यान रखकर, मदद करके और एक-दूसरे का साथ देकर भी दिखा सकते हैं| बेवजह की बहसों में न फँसकर एक समझदार नागरिक होने का प्रमाण दें| अपने ही देश के संसाधनों को, सड़कों को, परिवहन के संसाधनों, बाज़ार, मकान, दुकान इन सभी चीज़ों को नुक्सान न पहुँचाना भी देशभक्ति है|

हम देख रहे हैं लोग जगह-जगह मोर्चा निकाल रहे हैं| पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे है| गुस्सा जायज़ है| लेकिन अपनी ही गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने से आखिर हांसिल क्या होगा? अगर आक्रोश दिखाना है तो हमें अपने नेताओं के घर के सामने आक्रोश दिखाना चाहिए| उनके घर के सामने धरना देना चाहिए और उनसे माँग करनी होगी कि अब पानी सर से ऊपर चला गया है अब कुछ करने की ज़रूरत है, ईंट का जवाब पत्थर से देने की ज़रूरत है| पाकिस्तान को यह बताने की ज़रूरत हैं अगर हम तुम्हारे कलाकार, संगीत, खिलाड़ी, तुम्हारे खान-पान का दिल खोल कर स्वागत कर सकते हैं तो तुम्हारी इस नीच हरकत पर तुम्हे तुम्हारे बिलों से खदेड़ कर सज़ा भी दे सकते हैं, और अगर हमारे नेता ऐसा नहीं कर सकते तो अभी के अभी कुर्सी खाली करें और किसी ऐसे को यह मौका दें जो पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने का गुर्दा रखता हो|


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