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Thursday, September 22, 2016

ये हिंदुस्तान मेरा है... श्रद्धांजलि

ये हिंदुस्तान मेरा है... श्रद्धांजलि

एक श्रद्धांजलिश्री ए पी जे अब्दुल कलाम जी के नाम...

A P J Abdul Kalam, Abdul kalam

ये मुल्क़ मेरा है,
ये जहान मेरा है,
ये बंजर मेरे है,
ये गुलिस्तान मेरा है,
ये दर्द मेरा है,
ये ग़ुमान मेरा है,
मैं छोड़ के जाऊं कैसे?
ये हिंदुस्तान मेरा है|

अभी बहुत काम था बाकी,
अभी दुश्मन को था दिखाना,
मेरा मुल्क़ अमन चाहता है,
तुम नफ़रत ना फैलाना,
बाल सुफेद हुए तो क्या,
दिल जवान मेरा है,
दूर हटो ऐ दुनियावालो,
ये हिंदुस्तान मेरा है|

कमर थोड़ी झुक गयी थी,
पर इरादे बुलंद थे,
मुल्क़ की तरक्कियों पे,
न करते घमंड थे,
ले जाना और आगे इस मुल्क़ को,
चल कर पैरो के जो, निशान मेरा है,
मैं छोड़ के जाऊं कैसे?
ये हिंदुस्तान मेरा है,
ये हिंदुस्तान मेरा है||

वो लम्हे... - प्रेम कविता

वो लम्हे... - प्रेम कविता

रोमांटिक प्रेम कविता 


Sad Man, Seashore, Sunset, Lonely Man, Alone Man

यह एक प्रेम कविता है| जिसमें  कवी ने अपनी प्रेम भावनाओं को प्रेम कविता का रूप देकर प्रस्तुत किया है| आइये इस प्रेम कविता का आनंद लें| 

कितनी रातें बीत गई पर मैं नहीं सोया,
ऐसा लगता है कब से मैं नहीं रोया,
तू चला गया है यह जानता हूँ फिर भी,
ऐसा लगता है जैसे मैंने कुछ नहीं खोया,
कितनी रातें बीत गई...........................

दी थी जो पहली बार में तुने वो दुआएं,
माला बना कर उसको गले में है पिरोया,
कितनी रातें बीत गई...........................

पिया था पानी कभी जिन पयालों से तूने,
लगा कर लबों से हर रात है भिगोया,
कितनी रातें बीत गई...........................

तेरे हांथों के निशां अब भी मेरे दामन पर लगे हैं,
तभी तो आज तक मैंने उन निशानों को नहीं धोया,
कितनी रातें बीत गई...........................

आज भी मिलने आता है तू मुझसे ऐ सनम,
“साहिब” ने तेरी यादों को इस तरह है संजोया,
कितनी रातें बीत गई...........................

तेरी खुशियों के आगे मेरा वजूद कुछ भी नही,
“साहिब” ने तो खुद को तेरी यादों में है डुबोया,
कितनी रातें बीत गई...........................||

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